हस्ब-ए-हालात, ढलने की आदत है मुझे।
गिर-गिर कर संभलने की आदत है मुझे।।
हर हाल में हर एक वादा निभाया है मैंने।
ये ना सोच, यूं बदलने की आदत है मुझे।।
घर की खातिर , खुद को जलाया है मैंने।
ऐसा नहीं , कि जलने की आदत है मुझे।।
गर तुम चाहो तो तन्हा छोड़ दो सफर में।
अब तो अकेले चलने की आदत है मुझे।।
-यूनुस खान
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