विज्ञापन

"मधुमेह परिस्थिति से यथास्थिति तक यात्रा की वस्तुस्थिति"

Your Name

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मधुमेह, हमारी ही, लापरवाही से उत्पन्न, एक परिस्थिति है,
        
                                                    
                            
इसका मूल कारण, कुछ ना कुछ, खाते रहने की आवृत्ति है,

उस पर भारी, आवश्यकता से, अधिक, खाने की, प्रवृत्ति है,
खुशखबरी यह है, इन पर लगे लगाम तो बात बन सकती है,

यहां बात हो रही है, हम खाना कब कब, कितना खाया करें,
पर उतना ही अहम है, कि हम रोज़ घूमने, फिरने जाया करें,

सुस्ती छोड़ें समय से उठें सोयें काम करें हाथ पैर हिलाया करें,
जिस शरीर में भोजन रूपी ईंधन डाल रहे हैं, उसे चलाया करें,

ये हमारा जिस्म, उस का बनाया हुआ, एक नायाब निज़ाम है,
जो खाना खाया जाए उसे इस्तेमाल करने का पूरा इंतज़ाम है,

पर बेतरतीबी से, खाना खाने से, ये निज़ाम गड़बड़ा जाता है,
निठल्ले बैठें रहें आप और उस बिचारी शक्कर पर इल्ज़ाम है,

अपने मन की सभी इच्छाएं पूरी करें, जो खाना हो ज़रूर खाएं,
सेहत संभालें, भूख लगे उतना खाएं, दिन में बस दो बार खाएं,

पर आप जितना खाएं, उसे पचाने और ठिकाने लगाने के लिए,
चुस्त फुर्तीले रहें, कसरत करें, सेहतमंद रहें, खुशियां अपार पाएं.

~ नितिन जोधपुरी 'छीण'
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

विजय कुमार

172 कविताएं

View Profile

Priya Mehra

1 कविता

View Profile