विज्ञापन

कोरोना

Yatiraj Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोरोना
        
                                                    
                            
बहुत हो चुकी चुप्पी चहचहाना चाहता हूँ ,
खामोश पड़े नगमें गुनगुनाना चाहता हूँ ।

कब तक ज़ुल्म ढाएगा कोरोना
कब तक ढूंढते रहेंगे हम कोना ,
बंद पड़ा रहा अब बाहर आना चाहता हूँ ।

बेलज़ीज़ खाने से तंग आ चुका
बेलज़ीज़ जीने से तंग आ चुका ,
कुछ जायकेदार चखना चाहता हूँ ।

न कोई दावत न कोई त्योंहार
न जन्मदिन न शादी की मनुहार ,
अपनों के साथ जश्न मनाना चाहता हूँ ।

कितनों ने अपनों को खोया
कितनों ने सपनों को खोया ,
कब मरेगा ज़ुल्मी इसे दफनाना चाहता हूँ ।

यतिराज बजाज “प्रेरणा”
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile