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इजहारे इश्क

Yadav Upendra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी मिलो तो रुखसत करें इश्क
        
                                                    
                            
चलती हो सहेलियों के साथ,कभी अकेले मिलो तो बात करें इजहारे इश्क का,
तेरी यह जुल्फ घटाएं बिखरे बाल, दाएं गाल
का तिल परियों की बनावट सी लगती है कभी तेरे आंखों में
आंखें डाल कर गलत बातों का हां में हां करूं
मैं उसे भी तू समझदार है इश्क नहीं,
तो मिले कभी अकेले में तो
बात करें इजहारे इश्क का -Upendra yadav


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6 वर्ष पहले
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