कभी मिलो तो रुखसत करें इश्क
चलती हो सहेलियों के साथ,कभी अकेले मिलो तो बात करें इजहारे इश्क का,
तेरी यह जुल्फ घटाएं बिखरे बाल, दाएं गाल
का तिल परियों की बनावट सी लगती है कभी तेरे आंखों में
आंखें डाल कर गलत बातों का हां में हां करूं
मैं उसे भी तू समझदार है इश्क नहीं,
तो मिले कभी अकेले में तो
बात करें इजहारे इश्क का -Upendra yadav
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