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इश्क़ का पिंजरा..

Wasif Quazi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर पल.... उन्हें बस याद करते हैं ।
        
                                                    
                            
हम वक़्त..... कहाँ बर्बाद करते हैं ।।

बस...... उनके तसव्वुर से अपना ।
आशियाना........ आबाद करते हैं ।।

चुपचाप..... सह लेते हैं सारे सितम ।
ख़िलाफ़ उनके कहां जेहाद करते हैं ।।

ख़ुद रहते हैं....... इश्क़ के पिंजरे में ।
बस परिंदों को हम आज़ाद करते हैं ।।

"काज़ी"......... चाहत की जादूगरी से ।
रंज के लम्हों को भी..... शाद करते हैं ।।


--डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
 
3 वर्ष पहले
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