विज्ञापन

जो होते हैं बुद्धजीवी वह कभी धर्म गुरु की चाल नहीं चलते हैं

WASI AHMAD QADRI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिया जलाने से दिल रौशन नहीं होता
        
                                                    
                            
दीवाली त्योहार खुशियां लेकर नही आता
पैसा वाला बल्ब_मॉडर्न लाइट से घर चमकाते
गरीबों का घर अंधेरा है जो दिवाली से पहले था
रौशनी की चमक से मां लछमी की प्रवेश नहीं होती
जो होते हैं ईश्वर के सदाचार वह कभी धनमाम नही होते हैं
असली पुजारी को हमने अपना महल नही देखा
धन का आना न शुभ न ही अशुभ है एक कहावत है
दिवाली के दिन आसमान से मां लछमी नही बरसती है
सच्चे वो मेहनत कश के साथ मां लक्ष्मी का साया रहता है
दौलत देता है इश्वर अगर किसी को तो आजमाता है
मैं समझता हूं पंडित और मौलाना ने सीधी राह नहीं जाना
धन की लोभी पंडित_ मुफ्तियों अपना फतवा चलाता है
जो होते हैं बुद्धजीवी वह कभी धर्म गुरु की चाल नहीं चलते
साइंस युग में पंडित_ पादरी और मुफ्ती की जरूरत है ही नही

वसी अहमद कादरी
 
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sarthak Piyush

28 कविताएं

View Profile

Nidhhi Mukesh

22 कविताएं

View Profile