दिया जलाने से दिल रौशन नहीं होता
दीवाली त्योहार खुशियां लेकर नही आता
पैसा वाला बल्ब_मॉडर्न लाइट से घर चमकाते
गरीबों का घर अंधेरा है जो दिवाली से पहले था
रौशनी की चमक से मां लछमी की प्रवेश नहीं होती
जो होते हैं ईश्वर के सदाचार वह कभी धनमाम नही होते हैं
असली पुजारी को हमने अपना महल नही देखा
धन का आना न शुभ न ही अशुभ है एक कहावत है
दिवाली के दिन आसमान से मां लछमी नही बरसती है
सच्चे वो मेहनत कश के साथ मां लक्ष्मी का साया रहता है
दौलत देता है इश्वर अगर किसी को तो आजमाता है
मैं समझता हूं पंडित और मौलाना ने सीधी राह नहीं जाना
धन की लोभी पंडित_ मुफ्तियों अपना फतवा चलाता है
जो होते हैं बुद्धजीवी वह कभी धर्म गुरु की चाल नहीं चलते
साइंस युग में पंडित_ पादरी और मुफ्ती की जरूरत है ही नही
वसी अहमद कादरी
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