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बनारस बुलाता है बार बार......

vyomesh chitravansh

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                            बुलाता है बार बार
        
                                                    
                            
हर तीज त्योहार पर
प्रयोगकर्मी बनारस, उत्सवधर्मी बनारस
परंपरावादी बनारस, अपने रंग में डूबा बनारस
अपने इतिहास संस्कृति पर
इतराता आधुनिक बनारस
जहां महादेव ईस्ट व भगवान नही
वे बावा है, बहुतअपने से हर किसी के
सर्व सिद्धि देवी अन्नपूर्णा देखती है
हर काशीवासी को माई बन कर
वह बनारस, जो रामनगर की लीला में
साथ साथ चलता है अपने प्रभु के संग
अयोध्या के राजमहल से जनकपुर की फुलवारी
चित्रकूट व पंचवटी से लंका फिर अयोध्या तक
वह बनारस जो प्याले का मेला को जीता है
तो नागनथैया में ग्वाल वन कान्हा के संग
कंदुक क्रीड़ा का सहभागी होता है
अस्सी से रथ को खींच खींच कर
रथयात्रा में अपने कान्हा को नानखटाई खिलाता है सारनाथ के मृगदाव में महीनो मेला देखता बनारस
दौड़ पड़ता है अपने रामजी को कान्हे पर लेने
नाटीइमली, जब वह लौटते है
चौदह साल बनवास के बाद अपनी अयोध्या में
दशहरे के आखिरी तीन दिनों
दुर्गामय होने वाला बनारस
गुलाब बाड़ी के केवड़ा फुहारों से
मसाने में होली व बुढ़वा मंगल में
जीवन व मृत्यु को उत्सव मनाता बनारस
नक्कटैया में अपने विरोध के स्वांग से शुरु
विश्वनाथ का बराती बन शिव बरात ही नही
सब को अपने ठेगें ये रख फगुआ पर
गरियाता, मौज मस्ती करता बनारस,
अमौसा जूतियाँ सोरहिया, ललहीछठ से
परदोस, एकादशी ही नही हर रोज
अपने मस्ती में जीता, अपने में रमता
तीन वार तेरह त्योहार मनाता बनारस
वह बनारस बुलाता है
छठ फगुआ अमऊसा पर
अपने अपनों को
जो दूर दराज गये है
कमाने पेट के खातिर
नहीं आ पाते छुट्टी,
भीड़ और रिजर्वेशन के कारण
पर ने नही बिलग हो पाते
अपनी माटी और बनारसियत से
याद कर कर के अपने बनारस को
जो हर तीज त्योहार पर बुलाता है
उन्हें बार बार, हर बार
हर तीज त्यौहार .........
एक घंटा पहले
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विजय कुमार

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