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रिश्तों की भाषा

Vivek Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिश्तों की परिभाषा बदली,
        
                                                    
                            
क्योंकि उनकी भाषा बदली!
इतना तुम क्यों बदल गए,
तुम हमसे ही अकड़ गए!!

पैर जमी से तभी उठाना,
जब तुम पूरे पर फैलाना!
पर तब भी मैं इक बात कहूंगा,
तुम अपने हो साथ रहूंगा!!


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6 वर्ष पहले
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