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ताउम्र साथ दो हमसफ़र बनकर

Vivek Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ मे झूठे वादे करते क्यूँ हो
        
                                                    
                            
उल्फ़त मे रात दिन मरते क्यूँ हो!

ताउम्र साथ दो हमसफ़र बनकर
मझधार मे साथ छोड़ते क्यूँ हो!

माना की क़िस्मत से मिलता है सब
फिर भी ज़द्दोज़हद से डरते क्यूँ हो!

अपने हिस्सें की बस रौशनी जला
तुम अंधेरे से 'विवेक' डरते क्यूँ हो !
-विवेक जौनपुरी
एक दिन पहले
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