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ताउम्र साथ दो हमसफ़र बनकर

                
                                                         
                            इश्क़ मे झूठे वादे करते क्यूँ हो
                                                                 
                            
उल्फ़त मे रात दिन मरते क्यूँ हो!

ताउम्र साथ दो हमसफ़र बनकर
मझधार मे साथ छोड़ते क्यूँ हो!

माना की क़िस्मत से मिलता है सब
फिर भी ज़द्दोज़हद से डरते क्यूँ हो!

अपने हिस्सें की बस रौशनी जला
तुम अंधेरे से 'विवेक' डरते क्यूँ हो !
-विवेक जौनपुरी
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4 घंटे पहले

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