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गंगा की धारा...

Vishnu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भागीरथ की तपस्या से
        
                                                    
                            
ब्रह्माजी के वचन से
हिमालय की गोद से
शंकरजी की जटा से
निश्चल निर्मल धारा निकली
निश्चल निर्मल गंगा निकली 
भागीरथी के नाम से
राख के ढेरो से
पापो को धोने से
पुण्य पवित्र करने से
बहती निकली बहती निकली
निश्चल निर्मल गंगा निकली
गंगोत्री के गौमूख से
हर-की-पौङी हरिद्वार से
निश्चल निर्मल धारा निकली
निश्चल निर्मल गंगा निकली 
अवध के मैदानो से
प्रयाग के संगम से
हर हर गंगे हर हर गंगे 
कानपुर के उधोगो से
मेली होती प्रदूषण से
फिर भी पवित्र नाम से
हर हर गंगे हर हर गंगे 
काशी के घाटो से
हिन्दुओ की श्रद्धा से
नमामिःगंगे योजना से
मुक्त होती प्रदूषण से
हर हर गंगे हर हर गंगे 

- विष्णुकुमार

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