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बचत करते हैं बचत की आदत लोगों को बताते हैं

Viresh Dutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आपके पास पहले ही बहुत सूट है
        
                                                    
                            
फिर नया सूट क्यों ला रहे हो
आपकी चप्पल जूते की शू रैक भर गई है
फिर बाजार से नए चप्पल जूते क्यों खरीद रहे हो
आपके कपड़ो की अलमारी आपके कपड़ो के बोझ से दब रही है
आपकी शूज रैक जूते चप्पल के वजन से टूट गई है
किसने कहा आप बाजार जाए तो कुछ ना कुछ खरीद कर लाए
ऑनलाइन सामान खरीदने के ऑर्डर आप बार-बार क्यों देते हो
आज कई लोगों के पास घर में कपड़े और जूते चप्पल बहुत हो गए हैं
कई लोग तो आज महंगे कपड़े एक बार खरीद कर पहनने के बाद उसे दोबारा नहीं पहनते हैं
कई लोगों को उनके पास कितने कपड़े हैं इसका आज पता ही नहीं है
आज फैशन और बदलते जमाने के अनुसार चलने के चलते बहुत से लोग अनाप-शनाप खरीदारी कर रहे हैं
झूठी शान व दिखावे के चक्कर में कई लोग आज अनावश्यक सामान व्यर्थ में खरीद रहे हैं
जीवन में सुकून शांति और सुख भौतिक चीजों से नहीं मिलता है
जिंदगी में अभावग्रस्त लोगों की सेवा करने से अलग शांति का अनुभव होता है
जीवन में बचत की आदत हर व्यक्ति में होनी चाहिए
अनावश्यक सामग्री पर खर्च कभी नहीं करना चाहिए
व्यक्ति को जो है उसमें संतोष का भाव रखना चाहिए
दिखावे के चक्कर में घर पर अनावश्यक सामान नहीं लाना चाहिए
चलो इस बार बाजार से कुछ नया नहीं लाते हैं
पहले खरीद कर लाए गए कपड़े और जूते चप्पल को पहनकर उसका पूरा उपयोग करते हैं
अनावश्यक चीज पर व्यर्थ खर्च नहीं करते है
बचत करते हैं बचत की आदत लोगों को बताते हैं
-वीरेश दत्त माथुर
22 घंटे पहले
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