वर्णमाला की सुंदर माला में, बस एक ही ऐसा अक्षर है,
जिसने देखी आज की दुनिया उसी ने देखा कल है।
दुनिया में जब आता है माँ से ही पहला नाता है,
अन्त समय में जपे राम, देखो, रा में माँ ही कह पाता है।
म से माता और ममता ही भवसागर के है खेवैैया,
म से माया और मोह में जब उलझ गया तब डूबी नैैया।
न माया लेकर आया है न लेकर उसको जाना है,
फिर क्यों इसमें उलझा मन, क्या यही जीवन का खजाना है?
सेवा-भाव की दौलत का, जिसने दिल से सम्मान किया,
उसी ने पाया दिव्य खजाना, सब कुछ उस पर कुर्बान किया।
माया-मोह के चक्रव्यूह में, केवल पश्चाताप और डर है,
इन बंधनों को त्याग कर जियो, बस यही मोक्ष का हल है।
वर्णमाला की सुंदर माला में, बस एक ही ऐसा अक्षर है,
जिसने देखी आज की दुनिया उसी ने देखा कल है।
-वीरेन्द्र राजहंस