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विनय की शायरी

Vinod Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैंने बांटी नहीं कभी, खुशियाँ किसी को
        
                                                    
                            
और खुद झोली फैलाये, खड़ा रहा मैं।
-विनोद कुमार "विनय"
एक घंटा पहले
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