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सुविधाओं का त्याग ज़रूरी हो जाता है

Vinod H.

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुविधाओं का त्याग
        
                                                    
                            
ज़रूरी हो जाता है
पाना हो ख़्वाब तो
नींद छोड़ना
अधूरी पड़ जाता है
जाकर बसा हो
दूर आसमाँ में कहीं
चाँद पाने की कोशिश में
हर दौर उबूरी हो जाता है

- विनोद यादव 'शहीद'


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6 वर्ष पहले
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