कल फिर देश भक्ति
की लहर बहेगी ....
चलो एक दिन ही सही
भारत माँ फिर प्रसन्न होगी
कल सुनेंगे फिर सब भाषण
प्रधानमंत्री का लाल किले से
परसों फिर निकालेंगे अर्थ
राजकारण का भाषण से
कल फिर मरणोपरांत
सोने का तमगा मिलेगा
परसों उसीके बेटे को
बिन डोनेशन
प्रवेश न मिलेगा
न जाने कब तक मेरा देश
दूसरों के घर छत्रपती ढूढेंगा
जाने कब घर घर में
मां जीजा मां भीमा मिलेगी
जाने कब तक भीमराव को
स्कालरशिप की बाट जोहनी होगी
न जाने कब तक हमारी शिक्षा
राजाश्रय पर पलेगी
कब तक एकलव्य को
अंगूठादक्षिणा देनी होगी
ले प्रण अब बदलाव
हमें लाना होंगा
छुड़ा झोली भारत को
गर मुकुट पहनाना होगा
हर कोयले से ढूंढ
हीरा हमें चमकाना होगा
बंद फीस का बाज़ार सर्वत्र
शिक्षा खुली करना होगा
वही सच्चा देशप्रेम होगा
जो करे वही सच्चा प्रेमी होगा
विनोद यादव 'शहीद'
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