दिल की अगन को
पहचानते हैं
सबको पता है
ये सब जानते हैं
जन्म देना है पूतों को
जीहां जी मुश्किल
फ़िर बनाना सपूत
जी और भी मुश्किल
ये जो बाहर गुनाह
कपूत करे हैं
सबको पता है
ये घर से चले हैं
पैरों में बेड़ी जो
घर पे पड़े है
बहन किसी की
जी फिर क्यों डरे हैं
दिल की अगन को
पहचानते है
सबको पता है
ये सब जानते हैं
पाप जन्मा नहीं है
यहाँ दो दिनों में
रहता मौजूद है ये
यहाँ हर किसीमें
ख़त्म करना है इसको
बस इतना करो तुम
साथ निर्बल के होकर
बस इससे लड़ो तुम
संग मिलके हमतुम
यहां जो खड़े हैं
ये तीर न तलवार
लाठी से ही डरे हैं
दिल की अगन को
पहचानते हैं
सबको पता है
सब जानते हैं
-विनोद यादव 'शहीद'
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