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रिटायरमेंट

Vinod H.

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक़्त जीवन में
        
                                                    
                            
सभी के आता है
दिन रिटायरमेन्ट का
क़रीब आता है
चालू होती क़वायद
फिर पेपरों की
टीस सी भी उभरती है
साथियों से बिछड़ने की
बीता हुआ हर मंज़र
नज़रों में तैर जाता है
किसी का दिल को छूना
किसी का छलना याद आता है ।



वक़्त जीवन में
कुछ ही के आता है
सार सेवा का सबको
नज़र आता है
सींचा लहू से
चमन के फूलों को
न पनपने दिया है
आलस की खरपतवारों को
पेंशन भय का संचार
सीने में उभर जाता है
किसीको वक़्त में मिलना
किसी को वक़्त का मिलना याद आता है ।


वक़्त जीवन में
बिरलों का आता है
भविष्य तंदुरुस्ती का
आसार नज़र आता है
खूब समय मिला है
अब खेलूंगा पोतेपोतियों से
वक़्त अब मिला है
कर दूंगा दूर घड़ी को सुइयों से
बड़ा अवमान किया है
वचन अब न करूँगा
दूसरों के लिए जिया है
ख़ुद के लिये जियूँगा
खुद ही में मैं जियूँगा

- विनोद यादव 'शहीद'


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6 वर्ष पहले
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