वक़्त जीवन में
सभी के आता है
दिन रिटायरमेन्ट का
क़रीब आता है
चालू होती क़वायद
फिर पेपरों की
टीस सी भी उभरती है
साथियों से बिछड़ने की
बीता हुआ हर मंज़र
नज़रों में तैर जाता है
किसी का दिल को छूना
किसी का छलना याद आता है ।
वक़्त जीवन में
कुछ ही के आता है
सार सेवा का सबको
नज़र आता है
सींचा लहू से
चमन के फूलों को
न पनपने दिया है
आलस की खरपतवारों को
पेंशन भय का संचार
सीने में उभर जाता है
किसीको वक़्त में मिलना
किसी को वक़्त का मिलना याद आता है ।
वक़्त जीवन में
बिरलों का आता है
भविष्य तंदुरुस्ती का
आसार नज़र आता है
खूब समय मिला है
अब खेलूंगा पोतेपोतियों से
वक़्त अब मिला है
कर दूंगा दूर घड़ी को सुइयों से
बड़ा अवमान किया है
वचन अब न करूँगा
दूसरों के लिए जिया है
ख़ुद के लिये जियूँगा
खुद ही में मैं जियूँगा
- विनोद यादव 'शहीद'
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