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लडक़ी पूछ रही है

Vinod H.

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आई आँच जब नारी पर
        
                                                    
                            
तब तीर राम का छूटा था
गदाधारी की गदा ने कैसे
पापी की जंघा तोड़ा था
गौतम नानक की भूमि ने
क्या पुरूष जनना छोड़ दिया
सिंहों की इस पावन भूमि ने
क्या सिंह बनाना छोड़ दिया

उठो भरत के वंशजों
अब तुम्हारी बारी है
जमा हुई गिद्धों की टोली
आँच बहन पर आई है
मासूम हिरणी पर कोई
आँख अभी न उठने पाए
उजले दामन को कोई
मैला हाथ न छूने पाए

तोड़ जकड़ती जंजीरों को
खड्ग हाथ में लेना है
ख़ैर नही महिषासुर तेरी
हर नारी दुर्गा होना है
कसम खाते दूध की
अब हम सिंह बन जाएंगे
लहू बहाकर महिष का
हम धर्म भारती निभाएंगे

-विनोद यादव 'शहीद'


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6 वर्ष पहले
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