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बिछड़ जाऊं कल अगर तुमसे मुझे याद करोगी ना

Vinod H.

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब कोई काली रात
        
                                                    
                            
नागिन बन तुम्हारे
सपनों को डसेगी
तब उम्मीद की किरण की तुम राह तकोगी ना
बिछड़ जाऊं कल अगर तुमसे मुझे याद करोगी ना

जब कोई दुख
साया बन तुम्हारे
सुख का पीछा करें
तब मन की रोशनी प्रज्वलित करोगी ना
बिछड़ जाऊं कल अगर तुमसे मुझे याद करोगी ना

जब कोई पत्थर
रास्तें आ तुम्हारे
पथ को बाधित करें
तब तुम कोशिश की पराकाष्ठा करोगी ना
बिछड़ जाऊं कल अगर तुमसे मुझे याद करोगी ना

जब कोई निराशा
हार बन तुम्हारे
जीत का पछाड़ करें
तब आशा के सूरज की तुम राह तकोगी ना
बिछड़ जाऊं कल अगर तुमसे मुझे याद करोगी ना

विनोद यादव 'शहीद'


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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