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कक्षा दस

Vinit Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुनाने को हमारे पास भी ग़म का फ़साना है
        
                                                    
                            
दर्द-ए-दिल मेरा सुनिए, ग़ज़ल तो एक बहाना है

"बनेगी वो मेरी दुल्हन", सभी दोस्तों से कहते थे
बात है तब की जब हम कक्षा दस में पढ़ते थे

कुछ पल लगे होंगे उन्हें इनकार करने में
छः साल लग गए थे हमें इज़हार करने में

मुझे मालूम था इनकार से डरता नहीं था मैं
वो ख़ूबसूरत थी और हैंडसम लड़का नहीं था मैं

वर्षों से भी लंबी एक ऐसी रात आई थी
बनी दुल्हन वो घर उसके बारात आई थी

दो दोस्त अपने पास हैं दुनियाँ में ले देकर
चिढ़ाते हैं मुझे अक्सर उसी का नाम ले लेकर
~ विनीत सिंह
 
2 महीने पहले
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