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माँ की ममता

Vineeta Chaurasia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत खास थी मां की ममता,बचपन के उस दौर में
        
                                                    
                            
यौवन की दहलीज पे आके, ममता माँ की आम हुई ।

दादीने पोते को प्यारसे, डाँट दिया तो क्या ही हुआ
माँ की ममता सरे आम फिर, सब जगह बदनाम हुई

बच्चे बाहर पढने गये तो,जाकर के वहाँ बस ही गये
जब भी गई तो माँ वहाँ जाकर, कुछ दिन की मेहमान हुई ।

कुछ दिन रख लो तुम मम्मी को फिर, कुछ दिन हम रख लेंगे
जेंसे मम्मी घर का कोई, फालतू सामान हुई

जिसके पास रहेगी ज्यादा, माँ उसको हो पेंशन देंगी
कुछ इसी तरह से माँ की ममता,आंगन में नीलाम हुई
9 महीने पहले
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