बहुत खास थी मां की ममता,बचपन के उस दौर में
यौवन की दहलीज पे आके, ममता माँ की आम हुई ।
दादीने पोते को प्यारसे, डाँट दिया तो क्या ही हुआ
माँ की ममता सरे आम फिर, सब जगह बदनाम हुई
बच्चे बाहर पढने गये तो,जाकर के वहाँ बस ही गये
जब भी गई तो माँ वहाँ जाकर, कुछ दिन की मेहमान हुई ।
कुछ दिन रख लो तुम मम्मी को फिर, कुछ दिन हम रख लेंगे
जेंसे मम्मी घर का कोई, फालतू सामान हुई
जिसके पास रहेगी ज्यादा, माँ उसको हो पेंशन देंगी
कुछ इसी तरह से माँ की ममता,आंगन में नीलाम हुई
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