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नारी महिमा

Vinamka

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                             सृजनहार शक्तिअपार वसुधा की आन मैं नारी l
        
                                                    
                            
सकल विश्व ममता की धार शत्रु का काल मैं नारी l
मुझमें बस्ती श्रृष्टि अपार मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l

 पावनता में मैं ही सीता और वेदव्यास जी की गीता l
सकुचाती ना रणचंडी बन संपूर्ण विश्व मुझमें जीता l
महाकाल के कण्ड का कालकूट मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l

 पत्नी,बेटी ,मां,बहन भी मैं , हर रूप में हूं मैं विद्यमान l
मुझमें ही सब रिश्ते बस्ते घर - घर मैं हूं मैं विद्यमान l
मेरा एक नहीं स्वरूप अनेक मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l

आदि और अनंत भी मैं , संपूर्ण विश्व का अंत भी मैं ।
वेद,पुराण,अर्पण भी मैं संपूर्ण विश्व का समर्पण भी मैं ।
ब्रह्माण्ड सकल का मान भी मैं,मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l

 मैत्रेयी , गार्गी, लोपामुद्रा बन विदुषी चमकी चम-चम- चम l
और झांसी झलकारी बनकर शत्रु पर बरसी छन - छन - छन l
रणभेरी सा मैं नाद प्रबल, मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l

 पद्मावती का जौहर हूं मैं ,मीराबाई सा प्रेम अटल l
गंगा का पवन जल हूं मैं और सरस्वती सा ज्ञान प्रबल l
लक्ष्मी सा धन वैभव अपार , मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l

 जलती हुई चिंगारी मैं , कालों की काल मां काली मैं l
भक्ति भी मैं शक्ति भी मैं, वेदों की मधुर ऋचाएं भी l
पापी दुष्टों का अंत हूं मैं, मैं नारी हूं मैं नारी l
ना अबला ना बेचारी हूं मैं नारी हूं मैं नारी l
7 महीने पहले
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