उसने कदर न करी मेरी इसका कोई मलाल नहीं।
खुद से ज्यादा चाहकर होता कोई सवाल नहीं।
ऎसा लगता है के सालों से सो नहीं पाया।
तेरे जाने से क्या खो गया जो मैं नहीं पाया।
तू तो और रूठ जाता है मेरे मनाने से।
ये दिल नहीं बहलता है किसी बहाने से।
यूँ रूठ कर बैठा है तू बड़े जमाने से।
वो फूल हैं नाजुक सा बिखर जायेंगे।
मैं तो कांटा हूँ डरता हूँ गले लगाने से।
तमाम वादे तेरे याद हैं न भूलने वाले।
लौट कर आजा मुझे छोड़ कर जाने वाले ।
ViMal
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।