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लौट कर आजा

vimal yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसने कदर न करी मेरी इसका कोई मलाल नहीं।
        
                                                    
                            
खुद से ज्यादा चाहकर होता कोई सवाल नहीं।
ऎसा लगता है के सालों से सो नहीं पाया।
तेरे जाने से क्या खो गया जो मैं नहीं पाया।
तू तो और रूठ जाता है मेरे मनाने से।
ये दिल नहीं बहलता है किसी बहाने से।
यूँ रूठ कर बैठा है तू बड़े जमाने से।
वो फूल हैं नाजुक सा बिखर जायेंगे।
मैं तो कांटा हूँ डरता हूँ गले लगाने से।
तमाम वादे तेरे याद हैं न भूलने वाले।
लौट कर आजा मुझे छोड़ कर जाने वाले ।
ViMal


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6 वर्ष पहले
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