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मोहल्ला कभी था जो तेरा, अब आबाद नहीं है…

vikram A

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मोहल्ला कभी था जो तेरा, अब आबाद नहीं है…
        
                                                    
                            
जो काबा-कैलाश था मेरा, वो तेरे बाद नहीं है,,

कहने को अब भी होकर गुज़रता हूँ उन गलियों से मैं…
किसी भी शै से मगर कोई मुराद नहीं है,,

जानता हूँ, गुज़र तो जाएगी किसी तरह से ज़िंदगी…
"बिन तेरे" मगर ये शाद नहीं है…___
12 घंटे पहले
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