अरमानों के पंछी को कब तक कैद करेंगे हम
सारे ताले तोड़ दिये हम सारे पिजड़े खोल दिये हम
अब ना होगा कोलाहल कोई , ना होगी दस्तक दरवाजे
ना बाहर चाभी गुम होगी ,ना भीतर गुम होगा कोई
तड़पती खुशियां छोड़ दिये हम, गम के राही मोड़ दिये हम
फूलों से सजना छोड़ दिये ,कांटो से बचना छोड़ दिये हम
कि सारे ताले तोड़ दिये हम ,सारे पिजड़े खोल दिये हम
अब चांद रात को खुशी ना होगी , ना डरना होगा आमावस को
रात उजाला , दिन को अंधेरा , छोड़ दिये हम
सारे ताले तोड़ दिए हम, सारे पिज॒ऱे खोल दिये हम
जीवन का आजाद परिंदा जमी़ पर लाना छोड़ दिये हम
पंख कतरना छोड़ दिये और सारी कैची तोड़ दिये हम
कि सारे ताले तोड़ दिये ,सारे पिजड़े खोल दिए हम
कश्ती के पतवारो संग,नदी की बहती धारों के संग, हाथ चलाते मल्लाहों संग,हमने बढना छोड़ दिया
भंवरों में फंसना छोड़ दिये,लहरों से डरना छोड़ दिये हम
कि सारे ताले तोड़ दिए हम सारे पिजड़े खोल दिए हम ।
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