शोहरत की बुलंदियां ----
शोहरत की बुलंदियों में अपने भुलाय जाते हैं,
पद प्रतिष्ठा के खिसकते अपने ही याद आते हैं l
जीवन की लम्बी यात्रा एक सी नहीं चलती है,
सुख दुख की लहर यहां साथ साथ चलती है l
शोहरत की बुलंदी तो पल भर का तमाशा है,
सुख दुख के जीवन में तो बस भरी निराशा है l
गिरना उठना,उठना गिरना ये तो जीवन पथ है,
अचल अथाह सागर की लहरों जैसा ही पथ है l
जीवन पथ में परिवर्तन आता जाता रहता है,
परिवर्तन ही तो जीवन पथ की गाथा कहता है l
परिवर्तन का स्वागत करके हम सुख पाते हैं,
सबसे मधुर गीत हम दुख के स्वर में गाते हैँ l
- बीपी सिंह यादव