विज्ञापन

माँ की ममता ने मेरी सूरत

Vijay Erry

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ की ममता में मेरी सूरत
        
                                                    
                            
(माँ के दृष्टिकोण से)
जब पहली बार तुझे देखा था,
ईश्वर का उपहार लगा।
मेरी सूनी-सी दुनिया में,
सूरज का पहला प्रकाश जगा।
तेरी नन्हीं-सी मुस्कानों में,
अपनी हँसी नज़र आती है।
तेरी भोली-भाली बातों में,
मेरी ही बोली मुस्काती है।
तेरी आँखों की हर चमक में,
मेरे सपनों का नूर बसा।
तेरी हर छोटी-सी धड़कन में,
मेरे जीवन का सुर बसा।
तू गिरता है तो दर्द मुझे,
तू हँसता है तो मैं खिलती हूँ।
तेरे हर सुख की खातिर बेटा,
हर दुख चुपचाप मैं सहती हूँ।
तू मेरा अभिमान नहीं बस,
मेरी हर प्रार्थना का उत्तर है।
मेरे सूने जीवन-आँगन का,
तू ही सबसे सुंदर अवसर है।
तुझे संस्कारों का दीप दिया,
सत्य, दया का मार्ग बताया।
तेरे उज्ज्वल कल के लिए,
मैंने अपना आज लुटाया।
एक दिन तू उड़ जाएगा,
अपने सपनों का नभ छूने।
बस इतना याद सदा रखना,
माँ को मत देना कभी भूलने।
जब भी जीवन थका देगा,
जब कोई अपना साथ छोड़े।
याद रखना, माँ का आँचल,
हर बिखरे मन को फिर जोड़े।
मेरे बाद भी यदि कभी,
मेरी ममता को पाना चाहे।
किसी भूखी माँ की सेवा करना,
वहीं मुझे मुस्काता पाए।
मैं तो मिट्टी हो जाऊँगी,
पर ममता कभी नहीं मरती।
माँ का प्रेम नदी-सा बहता,
पीढ़ी-दर-पीढ़ी यूँ ही चलता।
तू मेरी कोख का अंश नहीं,
मेरे जीवन की पूरी कहानी है।
तेरे चेहरे में दिखती मुझको,
मेरी ही सबसे सुंदर निशानी है।
— विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile