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पिताजी !

Vidyadhar Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            होती नहीं आपकी आँखे नम
        
                                                    
                            
माँ की तरह
पर कहती हैं क्या?
मुझे पता है,
आखिर आपने ही तो
समझाया है मुझे
क्या अच्छा है
और क्या बुरा है.

आपकी कठोरता में
छुपी कोमलता
एक पिता
अपने बेटे से है क्या चाहता?
मुझे पता है.

आपके त्याग, आपकी पीड़ा का
है मोल क्या?
और है मतलब क्या
उस बोल अनमोल का
आप कहें ना कहें
मुझे पता है.

पर मैं
जल्द ही हर लूँगा
आपका सारा दुःख
और सच कर दूंगा
वो सारे सपने
जो देखे हैं
आपकी आँखों ने
प्यारे पिताजी !
क्या आपको पता है?
विद्याधर यादव 'विद्या '
विश्वकर्मा मंदिर, पिपरिस, भदोही, उ प्र
मो. 7408451525   


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7 वर्ष पहले
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