नंदकिशोर
गोकुल की गलियों का कान्हा
ठुमक-ठुमक पहुँचा बरसाना।
मुरली बजाए माखन चोर
नटवर नागर , नंदकिशोर॥
वृंदावन की लता - पताएँ,
कान्हा के मनv को हर्षाएँ।
यमुना तट पर मुरली बजाए
गोपियाँ दौड़ी - दौड़ी आएँ।
कान्हा मुरली मधुर बजाएँ,
मनमोहन मुस्कान लुटाएँ।
मिल राधा संग रास रचाएँ,
प्रेम-सुधा जग में बरसाएँ॥
पीताम्बर तन, मोर मुकुट सिर,
अधर धरे मुरली मुरलीधर।
देख छवि उनकी अति न्यारी
बलि बलि जाएं सब नर नारी।।
गोकुल हँसा, हँसा बरसाना
है धन्य हुआ वृंदावन धाम।
राधे-राधे गूँजे घर आँगन
कृष्ण बसे उर में अभिराम।।
गोकुल की गलियों का कान्हा
ठुमक ठुमक पहुंच बरसाना।
मुरली बजाए माखन चोर,
नटवर -नागर, नंद -किशोर॥
-वीना उदय