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प्यासा के भोजपुरी ग़ज़ल

विजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बात जे बीतल बा ओह के उखाड़त लोग ।
        
                                                    
                            
ना कबो देखल जे ओह के उपाटत लोग ।

आग के बुतावल,बा काहे लोग भुलाइल ,
जात के लड़ाई,बा काहे लगावत लोग।

जहां बहा सकेला,गंगा के प्रेम धारा ,
कहीं ना काहे उहवा जहर बहावत लोग।

तनकी सा घाट-बाढ़ बर्दाश से परे बा,
नाक ध के रोई अंखियां देखावत लोग।
--'प्यासा'
3 घंटे पहले
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