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दूसरा इन्सान आया मजाक उडा के गया ।

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसमां नम हुआ अश्क बहे शबनम बन ।
        
                                                    
                            
तिनकों ,कलियों ,फूलों ने समेटा ।
सूरज आया ,भाप बना उडा ले गया ।
इन्सान को गम हुआ .आँखों से नम हुआ ,
अश्क बहे।
ना किसी ने समेटा ना किसी ने पोछा ।
दूसरा इन्सान आया मजाक उडा के गया ।
4 घंटे पहले
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Ankit Kumar

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