आसमां नम हुआ अश्क बहे शबनम बन ।
तिनकों ,कलियों ,फूलों ने समेटा ।
सूरज आया ,भाप बना उडा ले गया ।
इन्सान को गम हुआ .आँखों से नम हुआ ,
अश्क बहे।
ना किसी ने समेटा ना किसी ने पोछा ।
दूसरा इन्सान आया मजाक उडा के गया ।