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नभ राज्य

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आग मस्तिष्क में चिंतन विस्तार कर!
        
                                                    
                            
सुप्ति में साधना कल्पना के काल कर!!

ध्वस्त रूपरेखाओं पर ना तू मलाल कर! कालखण्ड शेष जो है, शेष पर विचार कर!!

अंबकों को मूंद-मूंद हौसलों के हार कर!
क्षण-क्षण में उन्नति हो प्रकटन समकालकर!!

कर-कर से काज कर, आज कर, आज कर!
स्वप्नों में चेतना हो, नित्य नव विहार कर!!

व्योम कुल तिरी बूझ स्वयं पर भी साख कर!
दीवास्वप्न महिपाल नभ-गमन राज कर!!
राज कर,राज कर, नभ गमन राज कर!!
12 घंटे पहले
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