विज्ञापन

काश तुम

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काश तुम आज मेरे पास होते
        
                                                    
                            
मैं तुम्हें गले लगा कर रोती पूरी रात
ओर तुम कहते
नहीं तुम कुछ नहीं कहते

तुम बस मेरी सिसकियों को सुनते
मेरे आँसूओ को अपनी सफेद शर्ट पर बहने देते
मेरे मन में रह रहे बरसों के समंदर को अपने कंधों पर
आज उतरने देते
तुम बस चुप रहते
और शायद मै कुछ सुनती भी नहीं क्योंकि
तुम्हारी आवाज से ज्यादा मुझे तुम्हारी
मौजूदगी पसंद है
तुम्हारे दिलासा देते शब्द नहीं
तुम्हारा चुप आलिंगन पसंद है
काश आज तुम होते............
13 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rohit Sharma

57 कविताएं

View Profile