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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुमको भूलेंगे नहीं हमने भी ये सोचा है
        
                                                    
                            
ख़ुद पे इतना तो ख़ैर जान - ए - जां भरोसा है
ज़िन्दगी भर का सबक़ ले के इधर से निकले
वैसे कुछ भी तो नहीं हमने अभी देखा है
याद रखे हमें या कोई भूल जाए अब
जानने को ये कभी कोई कहां लौटा है
हम उन्हें माफ़ तो करते हैं मगर ऐ! हमदम
हर गुनाह कौन भला ऐसे माफ़ करता है
इस तरह 'रंग' खुदकुशी हुई धीमे - धीमे
कौन है ये जो बड़ी तेज़ चाल चलता है
- मृदुल 'रंग'
3 महीने पहले
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Deepak Sharma

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