तुमको भूलेंगे नहीं हमने भी ये सोचा है
ख़ुद पे इतना तो ख़ैर जान - ए - जां भरोसा है
ज़िन्दगी भर का सबक़ ले के इधर से निकले
वैसे कुछ भी तो नहीं हमने अभी देखा है
याद रखे हमें या कोई भूल जाए अब
जानने को ये कभी कोई कहां लौटा है
हम उन्हें माफ़ तो करते हैं मगर ऐ! हमदम
हर गुनाह कौन भला ऐसे माफ़ करता है
इस तरह 'रंग' खुदकुशी हुई धीमे - धीमे
कौन है ये जो बड़ी तेज़ चाल चलता है
- मृदुल 'रंग'
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