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" भूला तो कुछ नहीं ना मैं ? '

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मरना तो भूला हूँ मैं,
        
                                                    
                            
जीना तो शायद याद है।
अरे! उस भाग-दौड़ में,
भूला तो कुछ नहीं ना मैं?
तारे गिनना भूल गया हूँ मैं,
चाँद देखना तो शायद याद है।
अरे! उस आसमान मैं
भूला तो कुछ नहीं ना मैं?
किताब पढ़ना तो भूल गया हूँ मैं,
किताब लिखना तो शायद याद है।
अरे! किताबों की उस दुनिया में जाना,
भूला तो नहीं ना मैं?
घर का रास्ता तो भूला हूँ मैं,
कमरे की चार दीवारें शायद याद हैं।
अरे! घर से बाहर निकलना,
भूला तो नहीं ना मैं?
बचपन तो भूला हूँ मैं,
यादें शायद याद हैं।
अरे! बचपन की वह मुस्कान,
भूला तो नहीं ना मैं?
नींद तो भूला हूँ मैं,
शायद सपने देखना याद है।
अरे! उन सपनों को पूरा करना,
भूला तो नहीं ना मैं?
2 hours ago
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