विज्ञापन

निशान

Urmi .

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसके हाथों की पकड़
        
                                                    
                            
ऐसी थी जो-
बयान हो ना सके
वो समझंते है
गये कब के छुड़ा
हाथ हमसे
सच तो- यह है
हम आज भी
सिमटे हैं वही
तेरे हाथों में निशां
आज भी मेरे है वही
देख आईनें में जरा
खुद को
कहाँ दिखते नही-
मेरे निशां तुम को।
-ऊर्मि शर्मा
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all