विज्ञापन

इंतजार रहता लौटने का वो तुम हाँ तुम हो

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब की दो धडकनों के बीच में गैप् होता।
        
                                                    
                            
एक धड़कन जाती दुसरी का मिलन होता।।

अगली धड़कन की उम्मीद की तरह तुम हो
तुम्हारे नाम के आगे जश्न का इनाम होता।।

पलके झपकाई आँखो को आराम मिलता।
नजर उठा कर निहारने से इत्मीनान होता।।

साँस निरंतर चलती रहती अन्दर से बाहर।
और बाहर से अन्दर 'उपदेश' पैगाम होता।।

इंतजार रहता लौटने का वो तुम हाँ तुम हो।
उसको तुम्हारी स्मृतियों पर अभिमान होता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile