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इंतजार रहता लौटने का वो तुम हाँ तुम हो

                
                                                         
                            सब की दो धडकनों के बीच में गैप् होता।
                                                                 
                            
एक धड़कन जाती दुसरी का मिलन होता।।

अगली धड़कन की उम्मीद की तरह तुम हो
तुम्हारे नाम के आगे जश्न का इनाम होता।।

पलके झपकाई आँखो को आराम मिलता।
नजर उठा कर निहारने से इत्मीनान होता।।

साँस निरंतर चलती रहती अन्दर से बाहर।
और बाहर से अन्दर 'उपदेश' पैगाम होता।।

इंतजार रहता लौटने का वो तुम हाँ तुम हो।
उसको तुम्हारी स्मृतियों पर अभिमान होता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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52 मिनट पहले

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