विज्ञापन

ग़ज़ल लिखो

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करे क्या विचारों को विराम दीजिए।
        
                                                    
                            
वक्त निकालकर जरा आराम कीजिए।।

नाराज़ करना किसी को शोभा नहीं देता।
हो सके तो उनको भी सम्मान दीजिए।।

काम से काम रखो निजी सम्बन्धो में।
बेवजह रूठने मनाने को विश्राम दीजिए।।

जब बेचैन करे खामोशी तो ग़ज़ल लिखो।
कॉल आदि 'उपदेश' नजरअंदाज कीजिए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all