करे क्या विचारों को विराम दीजिए।
वक्त निकालकर जरा आराम कीजिए।।
नाराज़ करना किसी को शोभा नहीं देता।
हो सके तो उनको भी सम्मान दीजिए।।
काम से काम रखो निजी सम्बन्धो में।
बेवजह रूठने मनाने को विश्राम दीजिए।।
जब बेचैन करे खामोशी तो ग़ज़ल लिखो।
कॉल आदि 'उपदेश' नजरअंदाज कीजिए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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