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देख लो आकर

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं जिस हाल में हूँ देख लो आकर।
        
                                                    
                            
बेरंग जिन्दगी में रंग भर दो आकर।।

खुशियाँ भी गम के साथ टहल रहीं।
उनकी फितरत को बदल दो आकर।।

इंसानियत दरकिनार ना करना तुम।
जिम्मेदारियों का बोझ संभालो आकर।।

बिना दस्तक के चली आती मुसीबतें।
अतरंगे दाँव पेच ही सिखा दो आकर।।

लड़ रही हर रोज एक नये तूफान से।
'उपदेश' तुम ढाल बन जाओ आकर।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
19 घंटे पहले
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