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देख लो आकर

                
                                                         
                            मैं जिस हाल में हूँ देख लो आकर।
                                                                 
                            
बेरंग जिन्दगी में रंग भर दो आकर।।

खुशियाँ भी गम के साथ टहल रहीं।
उनकी फितरत को बदल दो आकर।।

इंसानियत दरकिनार ना करना तुम।
जिम्मेदारियों का बोझ संभालो आकर।।

बिना दस्तक के चली आती मुसीबतें।
अतरंगे दाँव पेच ही सिखा दो आकर।।

लड़ रही हर रोज एक नये तूफान से।
'उपदेश' तुम ढाल बन जाओ आकर।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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5 घंटे पहले

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