विज्ञापन

घर में 'उपदेश' बाहरी भी चिंता जता रहे लोग।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ग़म अपने अपने तरीके से सम्भाल रहे लोग।
        
                                                    
                            
मौका मिलते ही दूसरो को सीख दे रहे लोग।।

मेरी कहानी में मेरा किरदार कमजोर निकला।
उसे इश्क के नुस्खे देकर बैचैन कर रहे लोग।।

इस कदर की बेरुखी उनकी देखी नही कभी।
सोचकर सिहरन उस पर दर्द उभार रहे लोग।।

उनका चेहरा बार-बार सामने आकर कह रहा।
सुनना मुनासिब नही लगता वही कह रहे लोग।।

दिल का ज़ख्म भरने की हर कोशिश नाकाम।
घर में 'उपदेश' बाहरी भी चिंता जता रहे लोग।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7417 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13199 कविताएं

View Profile