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घर में 'उपदेश' बाहरी भी चिंता जता रहे लोग।।

                
                                                         
                            ग़म अपने अपने तरीके से सम्भाल रहे लोग।
                                                                 
                            
मौका मिलते ही दूसरो को सीख दे रहे लोग।।

मेरी कहानी में मेरा किरदार कमजोर निकला।
उसे इश्क के नुस्खे देकर बैचैन कर रहे लोग।।

इस कदर की बेरुखी उनकी देखी नही कभी।
सोचकर सिहरन उस पर दर्द उभार रहे लोग।।

उनका चेहरा बार-बार सामने आकर कह रहा।
सुनना मुनासिब नही लगता वही कह रहे लोग।।

दिल का ज़ख्म भरने की हर कोशिश नाकाम।
घर में 'उपदेश' बाहरी भी चिंता जता रहे लोग।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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